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अस्पतालों में भर्ती कम से कम आधे कोविड-19 के रोगियों में दो साल बाद भी कम से कम एक लक्षण बना रहता है: अध्ययन (Covid-19 symptoms even after 2 years-A study)

अस्पतालों में भर्ती कम से कम आधे कोविड-19 के रोगियों में दो साल बाद भी कम से कम एक लक्षण बना रहता है: अध्ययन अध्ययन में पाया गया कि 31% (351/1,127) रोगियों ने थकान या मांसपेशियों में कमजोरी की सूचना दी और 31% (354/1,127) ने नींद की कठिनाइयों की सूचना दी। दूसरी ओर, इन लक्षणों की रिपोर्ट करने वाले गैर-कोविड -19 प्रतिभागियों का अनुपात क्रमशः 5% (55/1,127) और 14% (153/1,127) था। कोविड -19 संक्रमण के दो साल बाद दुनिया को हिलाकर रख दिया, कोविद -19 के साथ अस्पताल में भर्ती आधे लोगों में कम से कम एक लक्षण है, एक नए अध्ययन ने सुझाव दिया है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल-द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 से उबरने वाले मरीज सामान्य आबादी की तुलना में प्रारंभिक संक्रमण के दो साल बाद भी "खराब स्वास्थ्य" में रहते हैं, यह दर्शाता है कि कुछ रोगियों को पूरी तरह से ठीक होने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। अध्ययन 1,192 प्रतिभागियों पर किया गया था, जिन्हें 7 जनवरी से 29 मई, 2020 के बीच-महामारी के पहले चरण के दौरान चीन के वुहान में कोविड -19 के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छुट्ट...

40 डिजिटल हेल्थ सर्विस एप्लीकेशंस को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के साथ सफलता से समन्वित किया गया (National Health Mission)

40 डिजिटल हेल्थ सर्विस एप्लीकेशंस को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के साथ सफलता से समन्वित किया गया पिछले 3 महीने के अंदर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) ने 13 डिजिटल हेल्थ सलूशन का समन्वय  किया। और इसी के साथ ही एबीडीएम इंटीग्रेटेड सर्विस एप्लीकेशन की संख्या 40 तक पहुंच चुकी है। पूरे भारत में इसका लॉन्च सितंबर 27, 2021 में किया गया था और आज के समय एबीडीएम भागीदार के पारिस्थितिक तंत्र में लगभग 16 सरकारी एप्लीकेशंस जबकि 24 प्राइवेट सेक्टर की एप्लीकेशंस हैं।  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) मुख्य रूप से नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचपी) की एक शानदार स्कीम है। एबीडीएम ने 13 डिजिटल हेल्थ सलूशन को पिछले 3 महीनों में समन्वित किया है और उसके साथ ही एबीडीएम की सुविधाएं देने वाली एप्लीकेशंस की संख्या 40 पहुंच जाती है। यह समन्वय एबीडीएम तथा हेल्थ टेक सर्विस प्रोवाइडर के बीच के अंतर को कम करके अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं के सुधार को को डिजिटल हेल्थ के स्पेस में एक साथ लाएंगे। यहां पर एबीडीएम की पिछली 13 एप्लीकेशन की जानकारी दी जा रही है जो कि इसने अपने भागीदार पारिस्...

पुरुषों और महिलाओं में बांझपन से संबंधित पांच मनोवैज्ञानिक मुद्दे (Fertility issues in Men & Women)

पुरुषों और महिलाओं में बांझपन से संबंधित पांच मनोवैज्ञानिक मुद्दे   दुनिया भर में लगभग 60-80 मिलियन बांझ कपल्स हैं। एम्स के अनुसार , भारत में लगभग 10-15% कपल्स में बांझपन की समस्या है। भारत में 30 मिलियन बांझ कपल्स में से लगभग 3 मिलियन सक्रिय रूप से इलाज चाहते हैं। शहरी आबादी में यह दर और भी अधिक है जहां हर छह कपल्स में से एक बांझपन से पीड़ित है और समाधान की तलाश में है। अधिकांश लोगों की अपने जीवन में कभी न कभी बच्चे की तीव्र इच्छा होती है। अधिकांश कपल्स कोशिश करने के एक वर्ष के भीतर गर्भधारण कर लेते हैं , जिसमें गर्भधारण की सबसे अधिक संभावना पहले के महीनों में होती है। इसी आधार पर , बांझपन को 12 महीनों के भीतर गर्भ धारण करने में असमर्थता के रूप में परिभाषित किया गया है। जो महिलाएं गर्भधारण करने में सक्षम हैं लेकिन गर्भावस्था को आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं , उन्हें भी बांझ माना जा सकता है। एक महिला जो कभी गर्भवती नहीं हो पाती है , उसकी डायग्नोसिस प्राइमरी बांझपन के रूप में की जाती है , जबकि जिन महिलाओं को अतीत में कम से कम एक सफल गर्भावस्था हुई है , उसकी डायग्नोसिस सेकेंडरी...

ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer)

  ब्रेस्ट कैंसर: जांच से इलाज तक ब्रेस्ट कैंसर दुनिया में सबसे आम प्रकार का कैंसर है , जो दुनिया भर में लाखों लोगों की जान ले लेता है।  प्राथमिक जांच के माध्यम से स्क्रीनिंग के नए और बेहतर तरीके सामने आए हैं जिससे महिलाओं को स्तन कैंसर के शुरुआती संकेतकों के बारे में शिछित करना काफी आसान हो गया है।  स्तन कैंसर का पता लगाने के कुछ तरीके निम्न हैं : 20 साल की उम्र से ही हर महीने पीरियड्स खत्म होने के पांच दिन बाद ब्रेस्ट की स्वतः जांच करें (पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाएं महीने का कोई भी दिन निश्चित कर सकती हैं) , 20 वर्ष की आयु के बाद किसी प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा ब्रेस्ट की सालाना जांच , तथा 45 साल की उम्र के बाद रेगुलर मैमोग्राम करवाएं। निम्न में से कोई भी लक्षण ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकता है: ·        ब्रेस्ट तथा बगल में गांठ का पड़ना जो कि समय के साथ बढ़ता जाता है तथा आमतौर पर दर्द रहित होता है ·        निप्पल से लाल या दूधिया रंग का डिस्चार्ज ·        हाल में ही निप्प...

जॉइंट रिप्लेसमेंट (Joint Replacement)

इस आर्टिकल का उद्देश्य बुजुर्ग लोगों में जॉइंट रिप्लेसमेंट के बारे में गलत धारणा को दूर करना है जो घुटने की गंभीर समस्याओं से पीड़ित हैं।  नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने वाले लोगों का जीवन काफी आसान हो जाता है। मधुमेह , उच्च रक्तचाप या हृदय की समस्याओं वाले लोग भी घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी से लाभान्वित हो सकते हैं। घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी से गुजरने वाले प्रत्येक रोगी को पहले सर्जिकल प्रोफाइल चेक-अप से गुजरना होगा ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मरीज सर्जरी के लिए फिट है या नहीं।  ज्यादातर लोग नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के छह से आठ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। एक बड़ी डॉक्टर ने बताया कि हम अक्सर कई रोगियों और परिवारों से मिलते हैं जिन्हें नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में बहुत सारी गलतफहमियां हैं। हमारे ओपीडी में आने वाले बहुत से रोगी हमें बताते हैं कि वे पिछले कुछ वर्षों से घुटने के दर्द से पीड़ित हैं और विभिन्न भ्रांतियों के कारण नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने से डरते हैं। यह सभी मरीज अच्छा महसूस कर रहे हैं और सर्जरी के बाद दर्द मुक्त जीवन जी रहे हैं। जब मरीज हमारी ओपीडी ...

कैंसर के लिए देखभाल (Cancer Management)

  कैंसर के लिए देखभाल ऑंकोलॉजी विभाग सभी चरणों के कैंसर के इलाज के लिए सक्षम है। ऑंकोलॉजी विभाग के पास सर्जिकल , मेडिकल (कीमोथेरेपी , इम्यूनोथेरेपी , और हार्मोन थेरेपी) , रेडिएशन थेरेपी , हेमटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सहित ऑन्कोलॉजी में हर तरह की सुविधाएं मौजूद हैं। ज्यादातर चुनौतीपूर्ण मामलों में निदान करने के लिए हमारे विशेषज्ञों की टीम बेहद कुशल है जैसे कि बीमारी किस स्टेज पर है , बीमारी का दवाओं के साथ इलाज करना , रेडियोथैरेपी , या फिर कैंसर का इलाज करने के लिए किसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करना जिसके लिए हॉस्पिटल पूरी तरह से सुसज्जित है। भारत के हॉस्पिटल हर उम्र के लोगों तथा बच्चों से संबंधित कैंसर रोग का निदान कर सकता है। मरीज की हर तरीके से देखभाल हमारे उपचार के मूल में है तथा इस कार्य को करने में हमारे विशेषज्ञ पूरी तरह से दक्ष हैं। भारत के अस्पतालों में सर्जिकल , मेडिकल और रेडिएशन स्पेशलिटी के साथ व्यापक ऑंकोलॉजी सेवाएं प्रदान करते हैं तथा हमारे पास रेडियोलॉजी , न्यूक्लियर मेडिसिन , पैथोलॉजी , साइकोलॉजी , रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी , आदि जैसी अन्य विशेषताएं भी हैं जो कि...