सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

doctor consultation लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer)

  ब्रेस्ट कैंसर: जांच से इलाज तक ब्रेस्ट कैंसर दुनिया में सबसे आम प्रकार का कैंसर है , जो दुनिया भर में लाखों लोगों की जान ले लेता है।  प्राथमिक जांच के माध्यम से स्क्रीनिंग के नए और बेहतर तरीके सामने आए हैं जिससे महिलाओं को स्तन कैंसर के शुरुआती संकेतकों के बारे में शिछित करना काफी आसान हो गया है।  स्तन कैंसर का पता लगाने के कुछ तरीके निम्न हैं : 20 साल की उम्र से ही हर महीने पीरियड्स खत्म होने के पांच दिन बाद ब्रेस्ट की स्वतः जांच करें (पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाएं महीने का कोई भी दिन निश्चित कर सकती हैं) , 20 वर्ष की आयु के बाद किसी प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा ब्रेस्ट की सालाना जांच , तथा 45 साल की उम्र के बाद रेगुलर मैमोग्राम करवाएं। निम्न में से कोई भी लक्षण ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकता है: ·        ब्रेस्ट तथा बगल में गांठ का पड़ना जो कि समय के साथ बढ़ता जाता है तथा आमतौर पर दर्द रहित होता है ·        निप्पल से लाल या दूधिया रंग का डिस्चार्ज ·        हाल में ही निप्प...

जॉइंट रिप्लेसमेंट (Joint Replacement)

इस आर्टिकल का उद्देश्य बुजुर्ग लोगों में जॉइंट रिप्लेसमेंट के बारे में गलत धारणा को दूर करना है जो घुटने की गंभीर समस्याओं से पीड़ित हैं।  नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने वाले लोगों का जीवन काफी आसान हो जाता है। मधुमेह , उच्च रक्तचाप या हृदय की समस्याओं वाले लोग भी घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी से लाभान्वित हो सकते हैं। घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी से गुजरने वाले प्रत्येक रोगी को पहले सर्जिकल प्रोफाइल चेक-अप से गुजरना होगा ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मरीज सर्जरी के लिए फिट है या नहीं।  ज्यादातर लोग नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के छह से आठ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। एक बड़ी डॉक्टर ने बताया कि हम अक्सर कई रोगियों और परिवारों से मिलते हैं जिन्हें नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में बहुत सारी गलतफहमियां हैं। हमारे ओपीडी में आने वाले बहुत से रोगी हमें बताते हैं कि वे पिछले कुछ वर्षों से घुटने के दर्द से पीड़ित हैं और विभिन्न भ्रांतियों के कारण नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने से डरते हैं। यह सभी मरीज अच्छा महसूस कर रहे हैं और सर्जरी के बाद दर्द मुक्त जीवन जी रहे हैं। जब मरीज हमारी ओपीडी ...

जनरल सर्जरी (General Surgery)

  जनरल सर्जरी मेडिकल एवं सर्जरी विभाग में जनरल सर्जरी एक ऐसी ब्रांच है जिसके लिए विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। जनरल सर्जरी के अंतर्गत एनाटॉमी , मेटाबॉलिज्म , न्यूट्रीशन , पुनर्जीवन , गहन देखभाल आदि जैसे विषय शामिल होते है। एक जनरल सर्जन किसी बीमारी के निदान , ऑपरेटिव तथा पोस्ट-ऑपरेटिव प्रबंधन का विशेषज्ञ होता है। जनरल सर्जन कई तरह की विशिष्ट सर्जरी के लिए प्रशिक्षित होता है जिनमें सिर और गर्दन , पेट , वैस्कुलर सिस्टम , एंडोक्राइन सिस्टम आदि शामिल हैं। भारत के हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी विभाग अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है और हजारों रोगियों की अनेक तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए डिजाइन किया गया है।  हमारे जनरल सर्जन विशेष रूप से अत्याधुनिक , हाई-टेक इंस्ट्रूमेंटेशन में प्रशिक्षित हैं और सर्जिकल रोगियों को व्यापक देखभाल प्रदान करने के लिए लगातार खुद को सुदृढ़ कर रहे हैं , जिसमें प्रीऑपरेटिव , ऑपरेटिव और पोस्टऑपरेटिव प्रबंधन के साथ-साथ मल्टीपल कॉम्प्लिकेशंस का प्रबंधन भी शामिल है। भारत के हॉस्पिटल्स विश्व में सबसे अच्छे जनरल सर्जरी हॉस्पिटल्स में से एक...

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंस (Gastrointestinal Science)

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंस गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट एक ट्यूबलर संरचना है जिसमें आहार नाल के साथ मुंह से गुदा तक के अंग शामिल होते हैं। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेष तौर पर पाचन तंत्र , पैंक्रियास , लिवर और पित्ताशय की थैली के विकारों से संबंधित है। लिवर तथा पाचन संबंधी रोग भारत में मौत के कारणों में पांचवें नंबर पर आते हैं। इसमें मुख्यतः गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग , पेप्टिकअल्सर रोग , फंक्शनल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर्स ,   गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग , पेनक्रिएटिकोबिलिअरी डिजीज , इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज , एक्यूट एवं क्रॉनिक लिवर तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मालिगनेंसी जैसे रोग शामिल हैं। डिपार्टमेंट ऑफ जनरल सर्जरी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन तथा गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की बेहद अनुभवी टीम है जो कि पाचन तथा लीवर संबंधी विकारों में स्पेशलिटी रखते हैं। लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी यह दोनों ही न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी हैं , लेकिन रोबोट के अतिरिक्त लाभ हैं जो इसे कुछ खास मामलों में एक बेहतर विकल्प बनाते हैं। रोबोटिक सर्जरी में , सर्जन एक कंसोल के माध्यम से काम क...

मोटापा एवं गुर्दे की बीमारी (Obesity & Kidney disease)

  किडनी डिजीज और मोटापे के बीच संबंध आज की पीढ़ी में मोटापा एक महामारी का रूप ले चुका है। यदि आपका वजन ज्यादा है तो इससे आपको किडनी डिजीज की समस्या हो सकती है , इसलिए मोटापे को कम करने का यही सही समय है। स्वस्थ वजन बनाए रखना  किडनी के साथ-साथ आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। मोटापा कई तरह की किडनी डिजीज का कारण बनता है। अधिक वजन वाले लोगों में डायबिटीज तथा हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ जाता है और  किडनी डिजीज के लिए यह दोनों ही प्रमुख कारक भी हैं। यह ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है कि भले ही दवाई से आप ब्लड शुगर , ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं , परंतु यदि आपका वजन अधिक है , तो दवाइयां लेने के बाद भी आपको किडनी डिजीज होने का खतरा है। ऐसे लोग , जिन्हें पहले से ही किडनी डिजीज है , उनमें मोटापा की संभावना अधिक होती है , जिससे बीमारी के अंतिम चरण में किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज एवं मोटापा है उन्हें अपनी किडनी का परीक्षण करवाते रहना चाहिए क्योंकि किडनी डिजीज का सबसे अधिक जोखिम उन्हें ही है। क्रॉनिक किड...

एपिलेप्सी (Epilepsy)

  एपिलेप्सी : महिलाओं के लिए एक छिपा हुआ खतरा   हाल के वर्षों में , स्वास्थ्य सेवा पूरी दुनिया में चिंता का एक प्रमुख क्षेत्र बन गया है। मिर्गी एक प्रमुख न्यूरोलॉजिकल विकार है जो काफी तेज़ी से बढ़ रहा है। यह रोग सेंट्रल नर्वस सिस्टम के ब्रेकडाउन से होता है जिसमें मस्तिष्क की गतिविधि असामान्य हो जाती है , जिससे दौरे या असामान्य व्यवहार , संवेदनाएं और यहां तक ​​ कि बेहोशी भी हो सकती है।   हालांकि इस स्थिति को ठीक करने के लिए उपचार उपलब्ध हैं , लेकिन रोगी को कुछ साइड - इफेक्ट्स का भी अनुभव हो सकता है। इस विकार से पीड़ित रोगी को दौरे को नियंत्रित करने के लिए फ़िनाइटोइन थेरेपी से लेनी पड़ती है। बचपन में यह थेरेपी लेने से हिर्सुटिज़्म , जिंजिवल हाइपरप्लासिया और चेहरे की बनावट अजीब होने का कारण बन सकती है। इसके अलावा , सोडियम वैल्प्रोएट , जिसका उपयोग मिर्गी और बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज के लिए किया जाता है , बालों के झड़ने , मुँहासे और ...