कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी
ह्रदय से जुडी हुई कुछ समस्याओं को जीवनशैली में
बदलाव और दवाओं के साथ प्रबंधित किया जा सकता है, जबकि कुछ अन्य समस्याएं जैसे कि
हार्ट ब्लॉक या ह्रदय की प्रमुख ब्लड वेसल जैसी समस्याओं को ठीक करने के लिए
सर्जरी की सहायता लेनी पड़ती है।
मेडिसिन की इस स्पेशलिटी को कार्डियोथोरेसिक या वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) कहा जाता है। सीटीवीएस का उपयोग हृदय, फेफड़े और छाती से जुड़े विकारों के प्रबंधन के लिए किया जाता है। कार्डियोथोरेसिक सर्जरी मुख्य रूप से बंद पड़ी कोरोनरी आर्टरी को खोलने, हार्ट के डिफेक्ट को ठीक करने या कमजोर हृदय की मांसपेशियों की मरम्मत के लिए की जाती है। दूसरी तरफ वैस्कुलर सर्जरी, ब्लड वेसल के विकारों से जुड़ी हुई है। इसके अंतर्गत लिंफेटिक वेसल्स, वीन तथा आर्टरी से जुड़े विकार शामिल हैं। वैस्कुलर सर्जरी के द्वारा ब्लड वेसल के पूरे नेटवर्क के प्रबंधन में सहायता मिलती है। वैस्कुलर सर्जरी रक्त के प्रवाह को पुनः ठीक करने के लिए भी की जाती है।
कार्डियोथोरेसिक सर्जरी के लिए, भारत में कई अच्छे हॉस्पिटल्स हैं जिसमें अनुभवी कार्डियोथोरेसिक सर्जन की एक पूरी टीम है
जो वैस्कुलर तथा हृदय से संबंधित सभी विकारों को ठीक करने में पूर्ण रूप से सक्षम
हैं। सभी सर्जन कार्डियोलॉजिस्ट तथा अन्य
हेल्थ केयर प्रोफेशनल के साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करते हैं जिससे मरीज को
विश्व स्तर की देखभाल हासिल होती है।
यह विभाग न्यनूतम इनवेसिव तकनीक के जरिए हार्ट वाल्व की मरम्मत करने में सक्षम है। हार्ट वाल्व की मरम्मत करने के लिए हमारा विभाग अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है तथा हर तरह के एडवांस ट्रीटमेंट उपलब्ध कराता है। इसके अलावा हॉस्पिटल्स की सीटीवीएस यूनिट, उपचार की सुविधा के लिए हाई एंड इक्विपमेंट्स तथा स्टेट-ऑफ-आर्ट टेक्नोलॉजी के साथ सुसज्जित है। गंभीर मरीजों के उपचार हेतु हमारे साथ क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा गहन चिकित्सा विशेषज्ञों की एक पूरी टीम रहती है जो कि आईएबीपी, ईसीएमओ तथा सीआरआरटी जैसे विकल्प भी प्रदान करती हैं।
सीटीवीएस के मुख्य क्षेत्र
निम्नलिखित हैं:
·
सीटीवीएस एडल्ट सर्जरी
·
सीटीवीएस पीडियाट्रिक सर्जरी
·
अन्य स्थिति जिन्हें सीटीवीएस के साथ प्रबंधित किया जा सकता
है:
·
कोरोनरी आर्टरी डिजीज
·
एओर्टा, माइट्रल, ट्राइकसपिड और पल्मोनिक वाल्व के वाल्व रोग
·
इनफेक्टिव एंडोकार्डाइटिस
·
रूमेटिक हार्ट डिजीज
सीटीवीएस एडल्ट सर्जरी
इसके अंतर्गत आने वाली कुछ सामान्य सर्जरी इस प्रकार
हैं:
·
ओपन हार्ट सर्जरी
·
कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (सीएबीजी)
·
रोबोटिक सीएबीजी
·
न्यूनतम इनवेसिव डायरेक्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास
(एमआईडीसीएबी)
हार्ट वाल्व सर्जरी
रोगग्रस्त या क्षतिग्रस्त हृदय वाल्व सामान्य रूप से
कार्य नहीं कर सकते हैं। इस कारण ह्रदय की मांसपेशिओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वाल्व
को बदलने से या फिर उसकी मरम्मत करने से वाल्व पुनः ठीक से काम करने लगते हैं
जिससे ह्रदय के ऊपर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में सहायता मिलती है।
·
माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट (एमवीआर)
·
डबल वाल्व रिप्लेसमेंट (डीवीआर)
·
ट्रीकस्पिड वाल्व रिपेयर/रिप्लेसमेंट
·
ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन
(टीएवीआई)/ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व रिपेयर (टीएवीआर)
·
कैल्सीफिकेशन के कारण, हृदय का एओर्टिक वाल्व संकरा हो
जाता है और पूरी तरह से खुलने में विफल रहता है, जिससे शरीर के बाकी हिस्सों में
ऑक्सीजन युक्त रक्त प्रवाह बाधित होता है। टीएवीआर एंजियोप्लास्टी की तरह एक
न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें एओर्टा के अंदर रखे कैथेटर की मदद से रोगग्रस्त
वाल्व को यांत्रिक वाल्व से बदलना शामिल है।
·
हार्ट पोस्ट-एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट (एवीआर) + माइट्रल
वॉल्व रिप्लेसमेंट (एमवीआर) + माइट्रल वॉल्व रिपेयर
स्टेंट प्लेसमेंट
इस प्रोसीजर में संकरी आर्टरी के अंदर एक धातु या
स्टेंट लगा दिया जाता है। इस प्रोसीजर को करने से पहले प्लाक हटाने के लिए डॉक्टर
को एंजियोप्लास्टी करनी होती है।
एओर्टा में स्टेंट डालना:
·
राइट एट्रिअल /लेफ्ट एट्रिअल मिक्सोमास
·
एओर्टिक एन्यूरिज्म रिपेयर
·
बेंटल प्रोसीजर
·
री-डु सर्जरी
·
फ्रोजेन एलीफैंट ट्रंक तथा एओर्टिक आर्क रिप्लेसमेंट
·
आइलैंड ग्राफ्ट के साथ असेंडिंग एओर्टिक अनुरिस्म रिपेयर +
इन्ट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (आईएबीपी)+ इको
कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर
सर्जरी क्या है?
कार्डियोथोरेसिक सर्जन एक ऐसा चिकित्सक होता है जो
हृदय, फेफड़े,
इसोफैगस तथा चेस्ट
के अन्य विकारों को ठीक करने का विशेषज्ञ होता है।
कार्डियोथोरेसिक सर्जन को कार्डियक सर्जन, कार्डियोवैस्कुलर सर्जन,
सामान्य थोरेसिक
सर्जन, एवं
हार्ट सर्जन भी कहा जाता है।
कार्डियोथोरेसिक तथा वैस्कुलर
सर्जरी की आवश्यकता किसे होती है?
इस तरह की सर्जरी की आवश्यकता ऐसे मरीजों को होती है
जिनकी आर्टरी या तो कमजोर हो चुकी हैं या फिर ब्लॉक हो चुकी हैं। ऐसे मरीज जिनके ह्रदय की मांसपेशियां कमजोर हो चुकी है
अथवा जिनके ह्रदय रोग ग्रस्त हैं या फिर उन्हें कोनजीनाइटल हार्ट डिजीज है को भी
इस तरह की सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
सर्जरी होने के पश्चात क्या होता
है ?
सर्जरी के पश्चात आपको गहन देखभाल यूनिट
(आईसीयू) में ले जाया जाएगा जहां गहन
चिकित्सक आपकी ब्रीथिंग, ब्लड प्रेशर, अलर्टनेस तथा घाव की निगरानी करेंगे। आमतौर पर रोगी
की ट्यूब पहले दिन या दूसरे दिन तक हटा दी जाती हैं तथा रोगी आमतौर पर 2 दिनों के बाद चलना शुरू
कर देता है तथा तीसरे दिन वार्ड में शिफ्ट हो जाता है जबकि 6 से 7 में दिन उसे डिस्चार्ज दे दिया
जाता है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें