इस आर्टिकल का उद्देश्य बुजुर्ग लोगों में जॉइंट रिप्लेसमेंट के बारे में गलत धारणा को दूर करना है जो घुटने की गंभीर समस्याओं से पीड़ित हैं। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने वाले लोगों का जीवन काफी आसान हो जाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप या हृदय की समस्याओं वाले लोग भी घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी से लाभान्वित हो सकते हैं। घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी से गुजरने वाले प्रत्येक रोगी को पहले सर्जिकल प्रोफाइल चेक-अप से गुजरना होगा ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मरीज सर्जरी के लिए फिट है या नहीं। ज्यादातर लोग नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के छह से आठ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं।
एक बड़ी डॉक्टर ने बताया कि हम अक्सर कई रोगियों और
परिवारों से मिलते हैं जिन्हें नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में बहुत सारी
गलतफहमियां हैं। हमारे ओपीडी में आने वाले बहुत से रोगी हमें बताते हैं कि वे
पिछले कुछ वर्षों से घुटने के दर्द से पीड़ित हैं और विभिन्न भ्रांतियों के कारण
नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने से डरते हैं। यह सभी मरीज अच्छा महसूस कर रहे
हैं और सर्जरी के बाद दर्द मुक्त जीवन जी रहे हैं। जब मरीज हमारी ओपीडी में आते हैं, तो हम न केवल उनकी भ्रांतियों को दूर करने में
मदद करते हैं, बल्कि उन्हें
इससे जुड़े लाभों के बारे में भी शिक्षित करते हैं, जिससे नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में उनकी सोच बदलने
में मदद मिलती है।
घुटने के दर्द का कारण घुटने के आसपास सूजन, घुटने में चोट के कारण हुई पोस्ट-ट्रॉमेटिक अर्थराइटिस,
ओस्टियोपोरोसिस, हड्डी का फ्रैक्चर या लिगमेंट का टूटना हो सकता है। समय के
साथ इस तरह की चोट कार्टिलेज को नुकसान पहुंचा देती है जिससे कि नी रिप्लेसमेंट
सर्जरी की आवश्यकता पड़ जाती है। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त
कार्टिलेज को कृत्रिम कार्टिलेज से से बदल दिया जाता है, जिससे कि रोगी कृत्रिम कार्टिलेज की सहायता से अपनी सभी
शारीरिक गतिविधियां एवं दैनिक गतिविधियों को स्वयं कर सकता है। नी रिप्लेसमेंट
सर्जरी घुटने के दर्द में राहत देती है।

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