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जनरल सर्जरी (General Surgery)

  जनरल सर्जरी मेडिकल एवं सर्जरी विभाग में जनरल सर्जरी एक ऐसी ब्रांच है जिसके लिए विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। जनरल सर्जरी के अंतर्गत एनाटॉमी , मेटाबॉलिज्म , न्यूट्रीशन , पुनर्जीवन , गहन देखभाल आदि जैसे विषय शामिल होते है। एक जनरल सर्जन किसी बीमारी के निदान , ऑपरेटिव तथा पोस्ट-ऑपरेटिव प्रबंधन का विशेषज्ञ होता है। जनरल सर्जन कई तरह की विशिष्ट सर्जरी के लिए प्रशिक्षित होता है जिनमें सिर और गर्दन , पेट , वैस्कुलर सिस्टम , एंडोक्राइन सिस्टम आदि शामिल हैं। भारत के हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी विभाग अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है और हजारों रोगियों की अनेक तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए डिजाइन किया गया है।  हमारे जनरल सर्जन विशेष रूप से अत्याधुनिक , हाई-टेक इंस्ट्रूमेंटेशन में प्रशिक्षित हैं और सर्जिकल रोगियों को व्यापक देखभाल प्रदान करने के लिए लगातार खुद को सुदृढ़ कर रहे हैं , जिसमें प्रीऑपरेटिव , ऑपरेटिव और पोस्टऑपरेटिव प्रबंधन के साथ-साथ मल्टीपल कॉम्प्लिकेशंस का प्रबंधन भी शामिल है। भारत के हॉस्पिटल्स विश्व में सबसे अच्छे जनरल सर्जरी हॉस्पिटल्स में से एक...

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंस (Gastrointestinal Science)

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंस गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट एक ट्यूबलर संरचना है जिसमें आहार नाल के साथ मुंह से गुदा तक के अंग शामिल होते हैं। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेष तौर पर पाचन तंत्र , पैंक्रियास , लिवर और पित्ताशय की थैली के विकारों से संबंधित है। लिवर तथा पाचन संबंधी रोग भारत में मौत के कारणों में पांचवें नंबर पर आते हैं। इसमें मुख्यतः गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग , पेप्टिकअल्सर रोग , फंक्शनल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर्स ,   गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग , पेनक्रिएटिकोबिलिअरी डिजीज , इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज , एक्यूट एवं क्रॉनिक लिवर तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मालिगनेंसी जैसे रोग शामिल हैं। डिपार्टमेंट ऑफ जनरल सर्जरी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन तथा गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की बेहद अनुभवी टीम है जो कि पाचन तथा लीवर संबंधी विकारों में स्पेशलिटी रखते हैं। लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी यह दोनों ही न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी हैं , लेकिन रोबोट के अतिरिक्त लाभ हैं जो इसे कुछ खास मामलों में एक बेहतर विकल्प बनाते हैं। रोबोटिक सर्जरी में , सर्जन एक कंसोल के माध्यम से काम क...

मोटापा एवं गुर्दे की बीमारी (Obesity & Kidney disease)

  किडनी डिजीज और मोटापे के बीच संबंध आज की पीढ़ी में मोटापा एक महामारी का रूप ले चुका है। यदि आपका वजन ज्यादा है तो इससे आपको किडनी डिजीज की समस्या हो सकती है , इसलिए मोटापे को कम करने का यही सही समय है। स्वस्थ वजन बनाए रखना  किडनी के साथ-साथ आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। मोटापा कई तरह की किडनी डिजीज का कारण बनता है। अधिक वजन वाले लोगों में डायबिटीज तथा हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ जाता है और  किडनी डिजीज के लिए यह दोनों ही प्रमुख कारक भी हैं। यह ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है कि भले ही दवाई से आप ब्लड शुगर , ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं , परंतु यदि आपका वजन अधिक है , तो दवाइयां लेने के बाद भी आपको किडनी डिजीज होने का खतरा है। ऐसे लोग , जिन्हें पहले से ही किडनी डिजीज है , उनमें मोटापा की संभावना अधिक होती है , जिससे बीमारी के अंतिम चरण में किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज एवं मोटापा है उन्हें अपनी किडनी का परीक्षण करवाते रहना चाहिए क्योंकि किडनी डिजीज का सबसे अधिक जोखिम उन्हें ही है। क्रॉनिक किड...

माइग्रेन की रोकथाम और प्रबंधन (Migraine Management)

  माइग्रेन की रोकथाम और प्रबंधन 1. पहले इसे ठंडा करें दर्द से राहत पाने के लिए अपने माथे , सिर या गर्दन के क्षेत्र पर आइस पैक लगाएं। विशेषज्ञ निश्चित रूप से यह नहीं जानते हैं कि यह कैसे काम करता है , लेकिन रक्त के प्रवाह को कम करना इसके काम करने का एक हिस्सा हो सकता है। आप फ्रोजन जेल पैक या ठंडे पानी में भिगोया हुआ एक कपडा भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 2. एक अँधेरा कमरा , सन्नाटे से भरा हुआ तेज रोशनी और तेज आवाज आपके सिरदर्द को और भी बढ़ा सकती है। तो काम से कुछ समय के लिए अवकाश लें तथा माइग्रेन होने पर कमरे के दरवाजों एवं खिड़कियों पर पर्दा डाल लें। इससे आप अच्छा महसूस करेंगे और जल्दी ठीक होंगे 3. उचित समय के लिए नींद लें माइग्रेन को कम करने में मदद करने के लिए कुछ सामान्य नींद लेना बेहद आवश्यक है। बहुत कम नींद या बहुत अधिक नींद सिरदर्द को ट्रिगर कर सकती है और दर्द सहने की आप की सीमा को कम कर सकती है। हर रात 7 से 8 घंटे की नींद आवश्यक है। आपको हर रोज एक ही समय पर बिस्तर पर सोने के लिए जाना चाहिए एवं सुबह एक ही समय पर उठने का प्रयास करना चाहिए। 4. अपने माइग्रेन के ट्रिगर क...

नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (Non-communicable disease)

जैसे-जैसे लोग अस्त व्यस्त तथा एक बेहद संपन्न जीवन शैली की तरफ बढ़ते जा रहे हैं, पूरे देश में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज लगातार बढ़ती जा रही हैं। नतीजतन, ज्यादातर लोग मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कोरोनरी धमनी की बीमारी , और यूरोलॉजिकल समस्याओं ( मूत्र संबंधी रोगों) जैसे प्रोस्टेट इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन, किडनी स्टोन और किडनी फैलियर जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश में गंभीर बीमारियों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। आज, हम देखते हैं कि युवा आबादी द्वारा हृदय की समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जब तक कि यह हृदय रोग बड़ा रूप नहीं ले लेते जिसके परिणाम बाद में बेहद घातक होते हैं। जैसे-जैसे मामलों की संख्या हर दिन बढ़ रही है, जन जागरूकता बढ़ाना और लोगों को हृदय रोग को महामारी बनने से रोकने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि यह आर्टिकल, हृदय की समस्याओं के विषय में और इसके समयअनुरूप निदान के विषय में तथा इसके उपचार के महत्व के बारे में जन जागरूकता में सुधार करेगी। पुरुष और महिला, दोनों ही तरह-...

अस्थमा के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल (Use of air purifier in Asthma)

अस्थमा के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल: उनकी प्रभावशीलता तथा उनका चुनाव किस प्रकार किया जाए   हर दिन , हमारा शरीर किसी भी अन्य पदार्थ की तुलना में सबसे अधिक हवा का इस्तेमाल करता है। हवा की गुणवत्ता पहले से कहीं अधिक खराब होने के साथ , हम विभिन्न प्रदूषकों को सांस के साथ अंदर ले रहे हैं , जिससे अस्थमा सहित कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। ' ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018'1 के अनुसार , भारत में 1.31 अरब लोग में से  6 प्रतिशत बच्चे और 2 प्रतिशत वयस्क अस्थमा से पीड़ित हैं।   यदि आप प्रदूषित हवा की वजह से सांस लेने में समस्या का अनुभव कर रहे हैं तो आपको स्वच्छ हवा प्राप्त करने के किसी समाधान की आवश्यकता महसूस हो रही होगी। हमारा सबसे पहला स्पष्ट विचार यही होता है कि हम अपने घर को चारों तरफ से बंद कर ले , ऐसा करने से हमें लगता है कि हमने प्रदूषण को रोक लिया है। परंतु सच्चाई तो यह है कि हम इस प्रदूषण को ही घर के अंदर बंद कर रहे हैं। अब इस बंद घर के अंदर , चाहे हम सो रहे हो , काम कर रहे हो , खाना बना रहे हो या व्यायाम कर रहे हो , हम लगातार प्रदूषित हवा में ही सांस...