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गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंस (Gastrointestinal Science)


गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंस

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट एक ट्यूबलर संरचना है जिसमें आहार नाल के साथ मुंह से गुदा तक के अंग शामिल होते हैं। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेष तौर पर पाचन तंत्र, पैंक्रियास , लिवर और पित्ताशय की थैली के विकारों से संबंधित है। लिवर तथा पाचन संबंधी रोग भारत में मौत के कारणों में पांचवें नंबर पर आते हैं। इसमें मुख्यतः गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग, पेप्टिकअल्सर रोग, फंक्शनल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर्स,  गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग, पेनक्रिएटिकोबिलिअरी डिजीज, इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज, एक्यूट एवं क्रॉनिक लिवर तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मालिगनेंसी जैसे रोग शामिल हैं। डिपार्टमेंट ऑफ जनरल सर्जरी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन तथा गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की बेहद अनुभवी टीम है जो कि पाचन तथा लीवर संबंधी विकारों में स्पेशलिटी रखते हैं।

लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी

यह दोनों ही न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी हैं, लेकिन रोबोट के अतिरिक्त लाभ हैं जो इसे कुछ खास मामलों में एक बेहतर विकल्प बनाते हैं। रोबोटिक सर्जरी में, सर्जन एक कंसोल के माध्यम से काम करता है तथा इसके द्वारा सर्जरी के दौरान उपकरणों को नियंत्रित किया जाता है।  सर्जरी के दौरान रोबोटिक उपकरण को कई दिशाओं से नियंत्रित किया जा सकता है जिससे सटीकता के साथ सर्जरी पूरी की जा सकती है। हालांकि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में भी टूल्स और असिस्टेड कैमरा का उपयोग शामिल है जिसमें सर्जन अपने हाथों से ऑपरेशन करता है परंतु फिर भी सर्जन एक रोबोट की तरह हर एक दिशा से एक निश्चित सीमा तक ही काम कर सकता है।

विभाग में आमतौर पर होने वाली कुछ सर्जरी निम्नलिखित हैं:

·        पित्ताशय की पथरी

·        अपेंडिक्स

·        सभी प्रकार के हर्निया

·        कॉन्प्लेक्स हर्निया

·        हीअटस हर्निया

·        अचलसिया कार्डिया

·        रेक्टल प्रोलेप्स के लिए सर्जरी

·        स्प्लेनेक्टोमी

·        गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर

·        एसोफेजल कैंसर

·        गैस्ट्रिक कैंसर

·        कोलोरेक्टल कैंसर

·        पेनक्रिएटिक कैंसर

·        स्टप्लेड हेमोराहाइडेक्टोमी

·        ट्रामा तथा आपातकालीन सर्जरी

·        लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक बेरिएट्रिक एवं मेटाबॉलिक सर्जरी

यहां पर ओबेसिटी को ठीक करने के लिए सर्जरी की जाती हैं। अलग-अलग तरह की सर्जरी में विभिन्न प्रकार के प्रोसीजर होते हैं जो आपको वजन के प्रबंधन में सहायता करते हैं। इसके लिए निम्नलिखित सर्जरी की जाती हैं:

·        स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी

·        रॉक्स-एन वाई गैस्ट्रिक बाईपास

·        अनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बाईपास

·        डुओडेनल स्विच

·        रिवीजन प्रोसीजर

·        रिवर्सल प्रोसीजर

·        बैंडेड प्रोसीजर

·        एंडोस्कोपिक स्लीव गैस्टेक्टोमी (ईएसजी)

 

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर वे होते हैं जो विभिन्न पाचन तंत्र तथा लिवर रोग के उपचार में विशेषज्ञ होते हैं। दस्त, हार्टबर्न, शरीर में सूजन, कब्ज और पेट में अल्सर आदि गैस्ट्रो से संबंधित रोग हैं। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो सर्वश्रेष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से चिकित्सकीय सहायता अवश्य लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट पहली विजिट पर क्या करता है?

आप की पहली विजिट पर आपके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट आप के लक्षणों का मूल्यांकन करेंगे एवं कंसल्टेशन के साथ ही आपके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट आपसे कुछ अन्य टेस्ट या प्रोसीजर के लिए अनुरोध कर सकते हैं जिनमें ब्लड टेस्ट, इमेजिंग स्टडीज, अथवा एंडोस्कोपिक एग्जामिनेशन शामिल हैं जिससे कि बीमारी का सही निदान किया जा सके।

मेरे मल में खून क्यों है?

मल में रक्त का सबसे आम कारण कोलाइटिस, क्रोहन रोग, मलाशय का अल्सर, कोलोन या एनल कैंसर, हेमोरॉयड तथा फिशर हो सकते हैं। इसके लिए आपको डॉक्टर से मिलने की सलाह दी जाती है जो आपकी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक परीक्षण और मेडिकल टेस्ट के आधार पर बीमारी का सही निदान कर सकते हैं।

मुझे कोलोन एग्जामिनेशन की तैयारी कैसे करनी चाहिए?

कोलोनोस्कोपी  एक ऐसा प्रोसीजर है जिसके द्वारा कोलोन में किसी भी तरह की असमानता को ढूंढा जाता है। कोलोनोस्कोपी से पहले पेट खाली रखने के लिए आपको लैक्सेटिव लेने के लिए सलाह दी जा सकती है। कोलोनोस्कोपी से 1 दिन पहले आपको केवल तरल आहार पर रहना होगा।

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