सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (Non-communicable disease)


जैसे-जैसे लोग अस्त व्यस्त तथा एक बेहद संपन्न जीवन शैली की तरफ बढ़ते जा रहे हैं, पूरे देश में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज लगातार बढ़ती जा रही हैं। नतीजतन, ज्यादातर लोग मधुमेह, उच्च रक्तचाप,
कोरोनरी धमनी की बीमारी, और यूरोलॉजिकल समस्याओं (मूत्र संबंधी रोगों) जैसे प्रोस्टेट इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन, किडनी स्टोन और किडनी फैलियर जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश में गंभीर बीमारियों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।

आज, हम देखते हैं कि युवा आबादी द्वारा हृदय की समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जब तक कि यह हृदय रोग बड़ा रूप नहीं ले लेते जिसके परिणाम बाद में बेहद घातक होते हैं। जैसे-जैसे मामलों की संख्या हर दिन बढ़ रही है, जन जागरूकता बढ़ाना और लोगों को हृदय रोग को महामारी बनने से रोकने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि यह आर्टिकल, हृदय की समस्याओं के विषय में और इसके समयअनुरूप निदान के विषय में तथा इसके उपचार के महत्व के बारे में जन जागरूकता में सुधार करेगी।

पुरुष और महिला, दोनों ही तरह-तरह के यूरोलॉजिकल समस्याओं से प्रभावित होते हैं। प्रोस्टेट इन्फेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन, किडनी फैलियर और यहां तक ​​कि यूरोलॉजिकल कैंसर भी यूरोलॉजिकल समस्याओं (मूत्र संबंधी रोगों) के उदाहरण हैं। यूरोलॉजिकल (मूत्र संबंधी) समस्याएं, समय के साथ और गंभीर रूप ले सकती हैं, इसलिए ध्यान रखें कि आप स्वयं इन यूरोलॉजिकल समस्याओं के प्रति सावधान रहें और समय-समय पर अपनी जांच कराते रहें। अपने चिकित्सक को नियमित रूप से कंसल्ट करना और किसी भी नए या असामान्य लक्षण की रिपोर्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

'बायोलॉजिकल ई' को कोविशील्ड, कोवैक्सिन के साथ टीकाकरण वाले वयस्कों में बूस्टर के रूप में कॉर्बेवैक्स के लिए ईयूए चाहिए (BIOLOGICAL E wnats permission for Booster Dose of Covid)

'बायोलॉजिकल ई' को कोविशील्ड, कोवैक्सिन के साथ टीकाकरण वाले वयस्कों में बूस्टर के रूप में कॉर्बेवैक्स के लिए ईयूए चाहिए  भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने पहले ही देश में विकसित आरबीडी प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन कॉर्बेवैक्स को पांच साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए आपातकालीन स्थितियों में प्रतिबंधित उपयोग के लिए मंजूरी दे दी थी। सूत्रों ने बुधवार को कहा कि 'बायोलॉजिकल ई' ने भारत के ड्रग रेगुलेटर को एक आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें कोविशील्ड या कोवैक्सिन के साथ पूरी तरह से टीकाकरण वाले वयस्कों में बूस्टर डोज़ के रूप में अपने कोविड वैक्सीन कॉर्बेवैक्स के लिए आपातकालीन उपयोग ऑथराइजेशन (EUA) अर्थात इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन की मांग की गई है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने पहले ही देश में विकसित आरबीडी प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन कॉर्बेवैक्स को पांच साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए आपातकालीन स्थितियों में प्रतिबंधित उपयोग के लिए मंजूरी दे दी थी। वर्तमान में, इसका उपयोग 12 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को टीका लगाने के लिए किया जा रहा है। DCGI को प्रस्तुत EUA आवेदन क...

वेगस नर्व स्टिमुलेशन: अवसाद के लिए एक अल्पज्ञात विकल्प (Vagus Nerve Stimulation)

 वेगस नर्व स्टिमुलेशन: अवसाद के लिए एक अल्पज्ञात विकल्प अवसाद के मानक उपचार अवसादरोधी और मनोचिकित्सा हैं। विशेष रूप से गंभीर मामलों में, इलेक्ट्रोकोनवल्सी थेरेपी (ईसीटी) या वेगस नर्व स्टिमुलेशन (वीएनएस) का भी संकेत दिया जा सकता है। वीएनएस पुरानी और थेरेपी रेसिस्टेंट डिप्रेशन के लिए एक अनुमोदित, प्रभावी, रोगी द्वारा अच्छी तरह से सहनशील, दीर्घकालिक चिकित्सा है, क्रिस्टीन रीफ-लियोनहार्ड्ट, एमडी, और यूनिवर्सिटी अस्पताल फ्रैंकफर्ट एम मेन, जर्मनी के शोधकर्ताओं की उनकी टीम ने हाल ही में एक पत्रिका में लिखा है। ईसीटी जैसे अधिक सामान्य उपचारों के विपरीत, वीएनएस सामान्य आबादी और विशेषज्ञों के बीच बहुत कम जाना जाता है। वीएनएस की लागत जर्मनी में स्वास्थ्य बीमा निधि द्वारा कवर की जाती है। 1994 से उपलब्ध है लेखकों की रिपोर्ट के अनुसार, इनवेसिव वीएनएस को 1994 में यूरोपीय संघ में और संयुक्त राज्य अमेरिका में 1997 में औषधीय चिकित्सा-रिफ्रैक्ट्री एपिलेप्सी वाले बच्चों के इलाज के लिए अनुमोदित किया गया था। क्योंकि वीएनएस के लगभग 3 महीनों के बाद वयस्कों में मनोदशा पर सकारा...

देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर हम यूएचसी के करीब पहुंचेंगे: राजेश रंजन सिंह (Transition of PHC to UHC in India)

देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर हम यूएचसी के करीब पहुंचेंगे: राजेश रंजन सिंह विश फाउंडेशन इंडिया के सीईओ राजेश रंजन सिंह से बातचीत के कुछ अंश: आंकड़ों से पता चलता है कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर 80 से 90 प्रतिशत मामलों या मानव स्वास्थ्य की जरूरतों से आसानी से निपटा जा सकता है। इसलिए, अगर हम इसे (प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा) को मजबूत करते हैं, तो हम बड़े भारतीय परिवेश में स्वास्थ्य सेवा की अधूरी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी): गैर सरकारी संगठनों की भूमिका हमने इसे देखा है, हमने यह अनुभव किया है कि मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं वास्तव में न केवल COVID या COVID जैसी बीमारियों के दौरान, बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी हमारी मदद कर सकती हैं। क्यों? क्योंकि आंकड़ों से पता चलता है कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के स्तर पर 80 से 90 प्रतिशत मामलों या मानव स्वास्थ्य की जरूरतों से आसानी से निपटा जा सकता है। इसलिए, अगर हम इसे (प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा) मजबूत करते हैं, तो मुझे लगता है, हम बड़े भारतीय परिवेश में स्वास्थ्य सेवा की अधूरी ज...