6-इन-1 टीकाकरण - शिशुओं और माता-पिता के लिए एक बड़ा वरदान
उत्तर प्रदेश में टीकाकरण के कवरेज को 69.6% से बढ़ाकर 90% किया जाना चाहिए; शहरी क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने की जरूरत
बच्चे असंख्य कीटाणुओं के संपर्क में आते हैं, जिनमें से कुछ गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। एक बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी भी विकसित हो रही होती है, और वह सभी घातक बीमारियों से नहीं लड़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सभी आयु समूहों के बच्चों में डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी), और टेटनस जैसे संक्रमणों से होने वाली मौतों को रोकने के लिए टीकाकरण सबसे सफल तरीकों में से एक है। 6-इन-1 टीकाकरण बच्चों को 6 तरह की गंभीर बीमारियों से बचाता है: डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, हेपेटाइटिस बी और पोलियो।
अलग-अलग छह टीके के लगाने के बजाय, मात्र एक 6 इन 1 टीका लगाना ज्यादा बेहतर है क्योंकि यह छह बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक इंजेक्शनों की संख्या को कम करता है। बच्चे के लिए दर्द और परेशानी कम होती है तथा माता-पिता कई बार पीडियाट्रिक्स के क्लिनिक में नहीं जाना पड़ता है। 6-इन-1 टीकाकरण से बच्चे, माता पिता एवं डॉक्टर, सभी के लिए आसानी रहती है। यह बच्चे के जीवन को बहुत आसान बना देता है और सभी के लिए वरदान है।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार, बच्चों को 6, 10 और 14 सप्ताह की उम्र में डीटीपी-आईपीवी-एचआईबी-एचईबी
के टीके लगवाने होंगे। 6-इन-1 टीकाकरण इन 6 रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। 6-इन-1 टीकाकरण का मतलब होगा कि बच्चे को इनमें से
प्रत्येक अवसर पर केवल 2 इंजेक्शन (यानी 6-इन-1 टीकाकरण और न्यूमोकोकल टीकाकरण) और 1 ओरल टीका (रोटावायरस टीकाकरण) लगेंगे। यदि 6-इन-1 टीकाकरण ना मौजूद होता तो बच्चों को 6 बार इंजेक्शन लेने पड़ते।
हाल के वर्षों में, भारत ने देश में टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के अपने प्रयासों को
तेज कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण - एनएफएचएस -5 में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भारत में 12 से 23 महीने के आयु वर्ग के बच्चों का प्रतिशत जिनका
टीकाकरण* पूरी तरह से हो चुका है, वह भारत में 62% (एनएफएचएस-4; 2015-16) से बढ़कर 76.4% (एनएफएचएस-5; 2019-21) हो गया है और उत्तर प्रदेश में 51.1% से 69.6% हो गया है। हाल के एक अध्ययन ने यह भी
प्रदर्शित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज में उल्लेखनीय सुधार
हुआ है, लेकिन शहरी
क्षेत्रों में सीमित सुधार ही हुआ है।
पूर्ण टीकाकरण के कवरेज को 90% और उससे अधिक तक बढ़ाने के लिए, माता-पिता को टीकाकरण के लाभों और टीकों की
उपलब्धता के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। 6-इन-1 टीकाकरण के साथ, बच्चों को कम इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं लेकिन
उन्हें सुरक्षा उतनी ही मिलती है जितनी की छह अलग-अलग इंजेक्शन लगाने से प्राप्त
होती।
* या तो टीकाकरण कार्ड या माता के स्मरण से
प्राप्त जानकारी के आधार पर
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